
कैमूर में बेतहाशा खुल रहे होटल–ढाबे, जनता खा रही है ज़हरीला खाना; फूड विभाग जांच में नाकाम
कैमूर जिले में हाल के महीनों में जिस तेज़ी से नए–नए होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट खुल रहे हैं, उसी तेज़ी से लोगों के बीमार पड़ने की घटनाएँ भी बढ़ती जा रही हैं। फूड सेफ्टी मानकों की अनदेखी, बिना लाइसेंस के दुकानें, गंदगीभरे किचन और नकली खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल ने आम जनता की सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इसके बावजूद फूड विभाग की टीम ज़मीन पर कहीं सक्रिय नजर नहीं आ रही। नतीजा यह है कि हर दिन कैमूर के किसी न किसी इलाके में ज़हरीला या घटिया खाना खाने से बीमार पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहे होटल–ढाबे
कैमूर जिले में शहर से लेकर हाइवे और बाजारों तक, हर जगह नए होटल और ढाबे तेजी से खुल रहे हैं। खास बात यह कि इनमें से अधिकांश के पास न तो FSSAI का लाइसेंस है और न ही कोई रजिस्टर्ड कागजी प्रक्रिया।
जिन बाजारों में पहले 10–12 होटल थे, वहां अब 40–50 होटल और ढाबे खुले मिल जाते हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश में
- न साफ–सफाई
- न मानक किचन सिस्टम
- न गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री
- न प्रशिक्षित कुक
- और न ही कोई हाइजीन मानक
ऐसे में सबसे अधिक जोखिम आम जनता, रोज़ाना सफर करने वाले यात्रियों और ट्रक–बस ड्राइवरों को उठाना पड़ रहा है, जो मजबूरी में ऐसे होटलों पर खाना खाते हैं।
फूड विभाग साल में केवल एक बार जांच?
नियमों के अनुसार, फूड विभाग का दायित्व है कि हर साल सभी होटल–ढाबों की जांच की जाए, सैंपल लिया जाए और गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
लेकिन कैमूर में हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
- स्थानीय लोगों का आरोप है कि:
- कई होटलों की कई वर्षों से जांच ही नहीं हुई।
- अधिकारी कागजों में जांच दिखाकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं
- वास्तविक स्थिति जानने के लिए मैदान में कोई टीम नहीं उतरती।
- कई होटल बिना लाइसेंस वर्षों से खुले हैं, लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं।
स्थिति यह है कि फूड विभाग की लापरवाही के चलते जिले में ज़हरीला या दूषित भोजन परोसना एक आम प्रचलन बन गया है।
ज़हरीला खाना खाने से बीमार पड़ रहे लोग
कैमूर जिले के कई इलाकों में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां लोग—बासी खाना मिलावटी तेल,खराब सब्जी,एक्सपायर मसाले,नकली दूध व दही,और दूषित पानी
के कारण फूड पॉइजनिंग का शिकार हो रहे हैं।
ताजा उदाहरणों में:
कई यात्रियों को सड़क किनारे ढाबे पर खाना खाने के बाद उल्टी–दस्त की शिकायत
कुछ ड्राइवरों का तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना
बच्चों के बीमार पड़ने की घटनाएँ
लोकल होटल में खाना खाने के बाद पूरे परिवार का बीमार होना
लोग इस डर से भी परेशान हैं कि कहीं यह सिलसिला आगे कोल्ड ड्रिंक से लेकर स्नैक्स और मिठाइयों तक न फैल जाए।
ग़ैर–मानक वातावरण में बन रहा है खाना
सूत्रों के रिपोर्ट की पड़ताल में पता चला है कि जिले के अधिकांश ढाबों और नये होटलों में:
- किचन बेहद गंदा
- मक्खियों और कीड़ों का जमाव
- कूड़ा–कचरा वहीं फेंका जाता है
- खाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री खुले कंटेनर में पड़ी रहती है
- पानी की कोई सटीक व्यवस्था नहीं
- रसोइयों के पास न ग्लव्स, न एप्रन, न कैप
इससे साफ दिखाई देता है कि होटल मालिक कम खर्च में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए आम जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
गैर–कानूनी रूप से संचालित हो रहे कई होटल
स्थानीय लोगों और कुछ व्यापारियों ने बताया कि जिले में कई होटल बिना किसी अनुमति और रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। कुछ होटल पटरी पर बैठे दुकानदारों की तरह खुल जाते हैं और कुछ बिना भवन स्वीकृति के मल्टी–फ्लोर होटल बनाकर व्यवसाय शुरू कर देते हैं खतरनाक स्थिति यह है कि कहीं भी फायर सेफ्टी स्टैंडर्ड नहीं सिलेंडर और गैस चूल्हे बेहद खतरनाक तरीके से रखे जाते हैं बिना वेंटिलेशन के किचन गंदगी और बदबू से भरा पूरा परिसर यह सब केवल फूड सेफ्टी ही नहीं बल्कि भारी दुर्घटना का कारण भी बन सकता है फूड विभाग पर उठ रहे बड़े सवाल लोगों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या फूड विभाग के अधिकारी जिले का दौरा नहीं करते क्या जांच केवल कागजों में पूरी होती है क्या विभाग होटल मालिकों से मिलीभगत में काम कर रहा है क्या जनता की सेहत की जिम्मेदारी किसी के पास नहीं फिलहाल विभाग की निष्क्रियता कैमूर जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है जनता की मांग – तत्काल छापेमारी हो स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है किया की पूरे जिले में फूड विभाग की टीम तत्काल अभियान चलाए सभी होटलों–ढाबों के लाइसेंस की जांच हो सैंपल लेकर फूड लैब में टेस्ट कराया जाए गंदगीभरे और बिना लाइसेंस वाले होटलों को तुरंत बंद किया जाए दोषी होटल मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए लोग चाहते हैं कि किसी बड़े हादसे या स्वास्थ्य संकट का इंतजार न किया जाए कैमूर जिले में होटल और ढाबों की अनियंत्रित बढ़ोतरी आम जनता की सेहत पर सीधा खतरा बन चुकी है। फूड विभाग की निष्क्रियता इस स्थिति को और गंभीर बना रही है यदि अब भी सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में जिले में खाद्य जनित बीमारियों का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। प्रशासन को तुरंत जागना होगा और लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे होटलों और ढाबों पर अंकुश लगाना होगा।